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सोमवार, 31 मई 2010

हिंदी पत्रकारिता दिवस - ३० मई - पर संगोष्ठी

इधर कुछ समय से हैदराबाद के वरिष्ठ हिंदी पत्रकार डॉ. हरिश्चंद्र विद्यार्थी जी अपने हर आयोजन में यह कहने लगे हैं, ''बस, यह मेरा अंतिम संयोजन है''. लेकिन हम लोग उनकी आयोजनजीविता या संयोजनधर्मिता को पहचानने के नाते जानते हैं कि हर तिमाही कम से कम एक संगोष्ठी या सम्मलेन आयोजित किये बिना वे रह ही नहीं सकते.

सो हर बरस की तरह ३० मई नज़दीक आते ही उन्होंने 'उदंत मार्तंड' की याद में ''हिंदी पत्रकारिता दिवस संगोष्ठी'' की घोषणा कर डाली. 'तेलंगाना बंद' के बावजूद संगोष्ठी हुई और खूब जमी.

समारोहअध्यक्ष डॉ. राधेश्याम शुक्ल ने आज की पत्रकारिता की लक्ष्यहीनता पर खेद जताया तो डॉ. अहिल्या मिश्र ने महिला पत्रकार की अपनी खतरोंभरी ज़िंदगी की ओर ध्यान खींचा. डॉ. विजयवीर विद्यालंकार ने आंध्र की आर्यसमाजी पत्रकारिता का यशोगायन किया तो नीरज ने धर्मनिरपेक्ष पत्रकारिता पर सांप्रदायिक हमलों की आपबीती सुनाकर रोमांच पैदा किया.और भी काफी लोग बोले. अपुन के जिम्मे संगोष्ठी की अध्यक्षता थी, सो टिप्पणियों से ही काम निकल गया.

विद्यार्थी जी थोक में सम्मान-पुरस्कार प्रदान करने वाली अनेक संस्थाओं के सूत्रधार हैं . इस अवसर पर भी उन्होंने हैदराबाद के कई नए-पुराने पत्रकारों को सम्मानित-पुरस्कृत किया. यह शुभकार्य उन्होंने उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल महामहिम डॉ. बी. सत्यनारायण रेड्डी के करकमलों से संपन्न कराया.

महामहिम ने अपने संक्षिप्त और सारगर्भित संदेश में भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीयता के लिए काम करने हेतु पत्रकारों का आह्वान किया.
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