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गुरुवार, 1 सितंबर 2011

डॉ. राधेश्याम शुक्ल को ''रामनाथ गोइन्का पत्रकार शिरोमणि पुरस्कार'' प्रदत्त

समग्र लेखन के लिए डॉ. बाल शौरि रेड्डी और 
अनुवाद के लिए डॉ. यार्लगड्डा  लक्ष्मी प्रसाद सम्मानित 


हैदराबाद, २८ अगस्त,२०११.


कमला गोइन्का फाउंडेशन ने गत रविवार  की शाम यहाँ पोट्टी श्रीरामुलु तेलुगु विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित एक भव्य पुरस्कार एवं सम्मान समारोह में हिंदी दैनिक 'स्वतंत्र वार्त्ता'  के सम्पादक डॉ. राधे श्याम शुक्ल को प्रतिष्ठित ''रामनाथ गोइन्का पत्रकार शिरोमणि पुरस्कार'' प्रदान किया. इस अवसर पर डॉ. शुक्ल को हिंदीतर क्षेत्र के वरिष्ठ हिंदी पत्रकार के रूप में सम्मानित करते हुए फाउंड़ेशन की ओर से प्रशस्ति पत्र, उत्तरीय, श्रीफल, स्मृतिचिह्न और सरस्वती की प्रतिमा के साथ ५१ हज़ार रुपए की राशि भी प्रदान की गई. स्मरणीय है कि ६२  वर्षीय डॉ. राधेश्याम शुक्ल अपने विद्यार्थीकाल से ही सोद्देश्य पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं तथा विगत १३ वर्षों से हैदराबाद में रहकर समाचार पत्र सम्पादक के अतिरिक्त अपने व्याख्यानों ओर लेखों के माध्यम से हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि के प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं.

साथ ही , इस समारोह में वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार डॉ. बाल शौरि रेड्डी को  उनके समग्र लेखन के लिए ''भाभीश्री रमादेवी गोइन्का सारस्वत सम्मान''तथा आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी के अध्यक्ष डॉ. यार्लगड्डा  लक्ष्मी प्रसाद को डॉ. हरिवंश राय बच्चन की आत्मकथा के हिंदी से तेलुगु में अनुवाद के लिए ''गीतादेवी गोइन्का हिंदी-तेलुगु अनुवाद पुरस्कार'' से सम्मानित किया गया. ये सभी सम्मान मुख्य अतिथि ज्ञानपीठ पुरस्कार ग्रहीता साहित्यकार डॉ.सी. नारायण रेड्डी के हाथों भेंट किए गए. डॉ. सी. नारायण रेड्डी ने तीनों हिंदी साहित्यकारों की हिंदी-सेवा की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा अपनी हिंदी-ग़ज़ल सुना कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया. इस अवसर पर समारोह के अध्यक्ष  प्रसिद्ध कला-संग्राहक एवं समीक्षक जगदीश मित्तल और विशेष  अतिथि एम. उपेंद्र के अतिरिक्त पुरस्कारदाता संस्था के श्यामसुंदर गोइन्का, ललिता गोइन्का,ॐ प्रकाश गोइन्का, सुशील गोइन्का, संजय गोइन्का भी बालकृष्ण गोइन्का मंच पर उपस्थित थे.
पुरस्कार के स्वीकृति भाषण में डॉ. राधेश्याम शुक्ल ने कमला गोइन्का फाउंडेशन के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए हिंदी के अखिल भारतीय स्तर पर ज़ोरदार प्रचार की आवश्यकता बताते हुए कहा कि भाषा और साहित्य वस्तुतः सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय संस्कृति के संवाहक ही नहीं संरक्षक और संप्रेषक भी होते हैं, अतः उत्तर और दक्षिण के सतही भेदों को भुलाकर हिंदी को समस्त भारतीय भाषाओँ के प्रतीक के रूप में आधुनिक विश्व के समक्ष समग्र भारत की पहचान बनकर उभरना होगा. डॉ. शुक्ल ने इस कार्य के लिए बुद्धिजीवियों के स्तर पर एक बड़े सामाजिक आन्दोलन की आवश्यकता बताते हुए  आंदोलन सभी भाषाओँ के साहित्यकारों का आह्वान किया कि वे इस विचार को मूर्त रूप दें. डॉ. राधेश्याम शुक्ल ने इस उद्देश्य से एक नवचेतना मंच के गठन की घोषणा करते हुए  उसके संयोजक राम गोपाल गोइन्का  को अपनी पुरस्कार राशि मंच के लिए प्रदान करने की घोषणा की. इससे प्रेरित होकर  कमला गोइन्का फाउंडेशन के संस्थापक न्यासी श्याम सुन्दर गोइन्का ने भी इस नवगठित मंच को पुरस्कार के बराबर अर्थात ५१ हज़ार रुपए की राशि प्रदान करने की घोषणा की.

अध्यक्षीय संबोधन में पद्मश्री जगदीश मित्तल ने हिंदी की समृद्धि पर प्रकाश डालते हुए साहित्येतर विषयों और कलाओं के विविध पक्षों पर व्यापक लेखन की आवश्यकता जताई तथा भारतीय भाषाओं, भारतीय कलाओं एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए आंदोलन के स्तर पर काम किए जाने के विचार का समर्थन करते हुए पुरस्कृत साहित्यकारों और आयोजक संस्था को शुभकामनाएं दीं. धन्यवाद प्रस्ताव के बाद जन-गण-मन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ.

[चित्र सौजन्य  : संपत देवी मुरारका एवं हरि कृष्ण]
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