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गुरुवार, 22 सितंबर 2011

सहज फोटोग्राफी : सरे-राह चलते-चलते

फोटो कार्यशाला : 10  : लिपि भारद्वाज 

स्वतंत्र वार्त्ता : 19  सितम्बर 2011                                              अनुवाद : सीएमपी अंकल 
!!पढने के लिए कृपया चित्र पर क्लिक करें!! 

5 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सहज भाव पर उसमें ही आते हैं।

Rajey Sha राजे_शा ने कहा…

पकड़े गये तो मुस्‍कुरा दीजि‍ये पर मुस्‍कुराने से पहले ही कोई कांड हो जाये तो? तो भई रि‍स्‍क तो लेना ही पड़ेगा यदि‍ आप ब्‍लॉग पर दुनि‍यां की फोटुएं डालकर दुनि‍यां भर के कमेन्‍ट लेना चाहते हैं जुर्म क्या? ये सजा क्यों है?

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

यही इच्छा है ,,, कोई मिल जाय सरे राह चलत चलते... फोटू खींचने के लिए:)

ऋषभ Rishabha ने कहा…

@Rajey Sha राजे_शा

दुनिया की फोटो डालकर कमेन्ट बटोरने वाले और होंगे.

आपके कमेन्ट का उत्तर भाग अप्रासंगिक लगा.

अस्तु, आपके आगमन और तिप्पने देने के लिए धन्यवाद.

ऋषभ Rishabha ने कहा…

@प्रवीण पाण्डेय
एवं
@चंद्रमौलेश्वर प्रसाद

आप दोनों की टिप्पणियों में भी सहजता का जो सुख है अन्यत्र दुर्लभ है....संतो सहज ब्लोगरी भली!!!