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शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

हिंदी व्यवसाय और विपणन की भी भाषा है


3 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आपके विचारों से पूर्ण सहमति।

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

आपके विचारों से प्रभावित होकर ही तो विभिन्न संस्थाएं आमंत्रित करती हैं। वर्ना अकसर अतिथि भाषा का बखान और संविधान की धाराये बता कर आतंकित करते रहते हैं॥

डॉ.बी.बालाजी ने कहा…

प्रणाम सर.

मैं आपकी बात से सहमत हूँ.
मेरे विचार से व्यवसाय और विपणन की भाषा होने की वजह से ही हिंदी ने कम समय में बड़ी लंबी यात्रा तय की है. अपना एक मुकाम बनाया है और इसीलिए आज सारा विश्व इसकी ओर झुक रहा है. इसके साथ जुड़ने और अपने को जोड़ने का प्रयास कर रहा है.