समर्थक

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

नामवर सिंह के सान्निध्य में शमशेर शताब्दी समारोह संपन्न



30 और 31 मार्च 2011 को हैदराबाद में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा और मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के रूप में शमशेर शताब्दी समारोह मनाया गया. उद्घाटन डॉ. गंगा प्रसाद विमल ने किया और बीज व्याख्यान डॉ. नामवर सिंह ने दिया. चार सत्रों में शमशेर बहादुर सिंह के व्यक्तित्व, संस्मरण, कविता और गद्य पर केंद्रित शोधपत्र और वक्तव्य प्रस्तुत किए गए. समापन सत्र में आशीर्वचन देते हुए डॉ. नामवर सिंह ने संगोष्ठी की शोधदृष्टि की मुक्त कंठ से सराहना की. 

पूरी रपट बाद में.
चित्र - डॉ.जी.नीरजा, डॉ.बी.बालाजी और राधाकृष्ण मिरियाला.

7 टिप्‍पणियां:

cmpershad ने कहा…

चित्र देखकर समारोह की सफलता का पता तो लग ही गया है। आपने और प्रो. दिलीप सिंह ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कोई कोर कसर नहीं रखी जिसे अन्य बंधुओं ने भी सहयोग दिया। चित्रों को देखकर एक कसक तो रही कि काश हम भी वहां होतॆ। बधाई स्वीकारें।

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव.


ये पत्नियां !

शिवकुमार ( शिवा) ने कहा…

नमस्ते सर जी ,
इस समारोह में आकर पता चला कि एक नामवर होना कितनी यातना देता है . जब मैंने नामवरसिंह जी को भोजन करते हुए देखा तो ..वे एक निवाला अपने मुंह में रखते तब तक उनके प्रसंसको में से कोई न कोई उन्हें आकर घेर लेता ... उनका खाना खाना भी दुश्वार कर दिया था ...
लेकिन उस समय आप कहीं भी नामवर सिंह जी के साथ नज़र नहीं आए ..
लेकिन उनके साथ मुझे तो मौका मिल ही गया ..और बालाजी तो उनसे टेका ही लेकर बैठ गए हैं ..

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

चित्र आयोजन की रपट बनाते हुये।

तनिष्क ने कहा…

थोड़ी देर के लिए ही सही कार्यक्रम का हिस्सा बनकर मैं अपने-आपको बड़ा भाग्यवान समझ रहा हूँ. इसके निम्न कारण हैं:-
१. परम आदरणीय नामवर जी को देखने और सुनने का मौका मिला.जिन्हें केवल पढ़कर ही खुश हुआ करते थे,उन्हें देखकर खुशी तो होगी ही.
२.कवियों के कवि शमशेर के बारे में जानने और कुछ हद तक समझने का मौका मिला.
३. उर्दू विश्वविद्यालय को देखने का अवसर मिला.
४.कार्यक्रम की फोटोग्राफी करने का भी मुझे मौका मिला और अलग-अलग प्रान्तों से पधारे वक्ताओं को सुनने-देखने का शुभ अवसर मिला.

और इन सभी उपलब्धियों के लिए मैं ह्रदय से प्रो.दिलीप सिंह जी,प्रो.ऋषभ देव शर्मा जी और प्रो.टी.वी.कट्टीमणी जी का बहुत-बहुत आभारी हूँ. तीनों महानुभावों को धन्यवाद और उनके सभी साथियों को इस तरह का सफल कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बधाई.- बालाजी

honesty project democracy ने कहा…

अच्छा और ईमानदारी भरा प्रयास है आपका साहित्य और संस्कृति के उत्थान का....

सतीश सक्सेना ने कहा…

हार्दिक शुभकामनायें !!