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शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

'केदारनाथ अग्रवाल की कविता में प्रेम' पर व्याख्यान संपन्न

अपने चंद्रमौलेश्वर प्रसाद जी ने 'कलम' पर रिपोर्ट लिख ही दी है, यों मैं क्या लिखूँ!

2 टिप्‍पणियां:

cmpershad ने कहा…

केदारनाथ अग्रवाल पर आपने बढिया प्रकाश डाला और उनकी ‘तुम’ पर अच्छी व्याख्या करते हुए उनकी प्रेम पर लिखी पत्नी को संबोधित कविताओं में छिपे मर्म को उजागर किया। केदार की कविता और ऋषभ की आवाज़ का तालमेल इस गोष्ठी में देखने को मिला। शाम सार्थक हुई।

ऋषभ Rishabha ने कहा…

@cmpershad

कविता बढ़िया हो तो स्वर का तालमेल तो खुद ब खुद आ जाता है. और फिर जब आप सरीखे पके हुए श्रोता सामने हों तो ........