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गुरुवार, 19 मई 2011

वह अज्ञेय था

आवाज़ एक - वह चिम्पैंजी था.
आवाज़ दो - वह हिजड़ा था.
आवाज़ तीन - वह लंपट था.
आवाज़ चार - वह बहुगामी था.
आवाज़ पाँच - वह अवैध संतान का पिता था.
आवाज़ छह -  वह अंग्रेजों का जासूस था.
आवाज़ सात- वह सीआईए का एजेंट था.
आवाज़ आठ - वह अमौलिक था.
आवाज़ नौ - वह कुंठित था.

दसवीं आवाज़ आकाश से आई - वह शब्द था
                                                      आकाश था
                                                      सृष्टि था
                                                      अज्ञेय था. 

2 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

छायावाद की छाया,
मन में मन भरमाया।

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

व्यक्ति एक, व्यक्तित्व अनेक... तभी तो अज्ञेय था :)