समर्थक

शनिवार, 31 दिसंबर 2011

भाषा संस्कृति संगम


भारत डिग्री कॉलेज फॉर वोमेन, काचीगुडा,हैदराबाद में २९ दिसंबर २०११  को ''भाषा-संस्कृति संगमम'' का आयोजन किया गया. वयोवृद्ध प्रो. ए.सुब्बा राव ने अंग्रेजी और उसमें बुनी संस्कृति पर समाज भाषा वैज्ञानिक नज़रिए से प्रकाश डाला , तो कवि और भाषातत्ववेत्ता प्रो. एम. सूर्यनारायण मूर्ति ने विस्तार से समझाया कि किस तरह तेलुगु भाषा और तेलुगु संस्कृति आज खतरे में हैं.

अपुन के जिम्मे तो भारतीय संस्कृति पर बोलना आया था. सो पंडित-द्वय अर्थात प.हजारी प्रसाद द्विवेदी और प.विद्या निवास मिश्र का सहारा लेकर अविरोधी धर्म, पुरुषार्थ चतुष्टय, आश्रम व्यवस्था, तीन ऋण तथा  तीन द [दमन-दान-दया] की व्याख्या कर दी और मुक्तिबोध का सहारा लेकर '' जो भी है उससे बेहतर चाहिए'' का नारा बुलंद कर डाला. [अरे हाँ, मुक्तिबोध से याद आया - उन पर केंद्रित फिल्म ''सतह से उठता  आदमी'' लाया है बेटा मुझे दिखाने के लिए. कल उसे दिल्ली लौटना है. चलूँ, वह फिल्म देख डालूँ. वरना बालक का दिल टूट जाएगा.]

एक टिप्पणी भेजें