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रविवार, 6 मार्च 2011

'स्रवंति' का उत्तरआधुनिकता विशेषांक लोकार्पित 2






'स्रवंति' का उत्तर-आधुनिकता विशेषांक लोकार्पित

हैदराबाद,5 मार्च 2011 .

''उत्तर-आधुनिकता बेहद उलझी हुई अवधारणा है. इसकी सैद्धांतिकी और हिन्दी साहित्य में उसके प्रतिफलन की पड़ताल करने वाला 'स्रवंति' का विशेषांक विषय की यथासंभव सीधी पहचान के कारण पठनीय और संग्रहणीय है.स्त्री, दलित, आदिवासी और जनजातीय हाशियाकृत समुदायों की अभिव्यक्ति का उत्तर-आधुनिक विमर्श के पहलुओं के रूप में विवेचन इसमें सभी विधाओं के सन्दर्भ में किया गया है जो इसे शोधार्थियों के लिए विशेष उपयोगी बनाने वाला है.''

ये विचार यहाँ उच्च  शिक्षा  और शोध संस्थान के 'साहित्य संस्कृति मंच' के तत्वावधान में आयोजित दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की साहित्यिक पत्रिका 'स्रवंति' के विशेषांक के लोकार्पण समारोह में अंग्रेज़ी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय [इफ्लू]के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. एम.वेंकटेश्वर ने व्यक्त किए. उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में पत्रिका के ''उत्तर-आधुनिक विमर्श और समकालीन साहित्य '' विशेषांक का लोकार्पण करते हुए कहा कि लघु पत्रिका के रूप में 'स्रवंति' ने दक्षिण भारत में अनेक नए लेखकों को प्रोत्साहित किया है तथा इस तरह हिंदी आंदोलन को प्रसारित करने में अग्रणी भूमिका निभाई है. 
समारोह की अध्यक्षता गैर-यूनिस विश्वविद्यालय , बेनगाज़ी [लीबिया] के अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष प्रो.गोपाल शर्मा ने की. उन्होंने 'स्रवंति' के एक वर्ष के मुखचित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया. इन चित्रों के लिए शौकिया-फोटोग्राफर लिपि भारद्वाज की रचनात्मकता की प्रशंसा करते हुए प्रो. गोपाल शर्मा ने याद दिलाया कि आज दुनिया तेज़ी से उत्तर - उत्तर आधुनिकता की ओर बढ़ रही है. उन्होंने ट्यूनीशिया,मिस्र और लीबिया की जन क्रान्त्यों और साथ ही मज़हबी कट्टरवाद के उभार को उत्तर आधुनिकता की समाप्ति  और उत्तर-उत्तर आधुनिकता के आरम्भ का लक्षण माना. प्रो. शर्मा ने नव -मीडिया के व्यापक प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि आने वाले समय में हर पाठक को लेखक बनना होगा.  

समारोह के द्वितीय चरण में 'स्रवंति' की सह-संपादक डॉ. गुर्रमकोंडा  नीरजा  को  मोतियों की माला, शाल, श्रीफल,लेखन सामग्री,स्मृति चिह्न  और पुष्प गुच्छ प्रदान कर उनका सारस्वत सम्मान किया गया. साथ ही कोसनम नागेश्वर राव को भी उत्तम कार्य के लिए शाल और स्मृति चिह्न प्रदान किया गया. 
इसके पूर्व दीप-प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के बाद संस्थान के अध्यक्ष प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने अतिथियों का परिचय कराते हुए स्वागत -सत्कार किया तथा आंध्र-सभा के सचिव डॉ. पी. राधाकृष्णन ने सभा की गतिविधियों की जानकारी दी. डॉ. जी. नीरजा ने लोकार्पित विशेषांक का परिचय दिया.

समारोह के तीसरे चरण में  कवयित्री ज्योति नारायण ने विशेष अतिथि के रूप में काव्य पाठ करते हुए अपनी चुनींदा हिन्दी-ग़ज़लों  और होली के गीतों का सस्वर वाचन किया. साथ ही डॉ. बी. बालाजी, चंद्रमौलेश्वर प्रसाद, भगवान दास जोपट, गुरु दयाल अग्रवाल और विनीता शर्मा ने भी अलग-अलग विषयों और विधाओं की रचनाएँ प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी.
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. करन सिंह ऊटवाल, डॉ. साहिरा बानू, डॉ.मृत्युंजय सिंह, डॉ.गोरख नाथ तिवारी, डॉ.देवेंद्र शर्मा, डॉ.सुरेंद्र शर्मा, डॉ.पेरीसेट्टी श्रीनिवास राव, डॉ. सुनीला सूद, ए.जी.श्रीराम, भगवंत गौडर, अर्पणा दीप्ति, मंजु शर्मा, पी. के. कल्याणकर, उमारानी , रमा देवी, कादर अली खान, जुबेर अहमद, सुभाषिनी, अंजू,पी. पावनी, स्मिता हर्डीकर, मल्लिकार्जुन,शिव कांत, राजेश कुमार गौड़, एस.कौडू, हेमंता बिष्ट, संध्या रानी, दर्वेश्वरी, जी. नागमणि, सुशीला मीणा,  सिसना, मोनिका देवी, सुशीला शर्मा, निशा सोनी, एम. राधा कृष्ण तथा छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया. 
संपूर्ण समारोह का संचालन डॉ. बलविंदर कौर ने  अत्यंत सफलता  और रोचकता पूर्वक किया.  

(उत्तर-गोष्ठी की रिपोर्ट यहाँ देखें.)

4 टिप्‍पणियां:

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

कार्यक्रम की सफलता में जो श्रम लगा उसके लिए समस्त स्रवंति टीम को बधाई॥ बढिया कार्यक्रम के लिए बहुत बहुत बधाई॥

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

इस उत्कृष्ट कार्यक्रम के लिये ढेरों बधाईयाँ।

Unknown ने कहा…

Aam taur par 9/11 se post-irony ki shuruaat maani jaati hai. Par shayad yah zyaada hi amreeka-centric hone ke karan hai!!

phir afrika men jo "civil wars" hote rahe hain, unke liye shayad post-irony bahut purani baat ho gai.

Sunil Kumar ने कहा…

कार्यक्रम की सफलता के लिए बहुत बहुत बधाई