6/9/2013 को दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद में
डॉ. ऋषभ देव शर्मा के छठे कविता-संग्रह
''सूं सां माणस गंध'' का
लोकार्पण करते हुए दिया गया
वरिष्ठ साहित्य-भाषा-चिंतक प्रो. दिलीप सिंह का
अत्यंत सारगर्भित दो-टूक वक्तव्य.
16/17 मई 2013 को कर्नाटक विश्वविद्यालय [धारवाड] के हिंदी विभाग में विशेष व्याख्यानमाला केअंतर्गत 'संरचनावाद', 'उत्तर संरचनावाद', 'आधुनिकता' और 'उत्तर आधुनिकता' परडॉ. ऋषभ देव शर्मा (प्रोफ़ेसर और अध्यक्ष, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान,दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद) के 4 व्याख्यान हुए.प्रस्तुत है उनमें से पहला व्याख्यान - "संरचनावाद -1".
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| स्व. अजंता की तेलुगु काव्यकृति 'स्वप्न लिपि' के हिंदी अनुवाद का लोकार्पण करते हुए प्रो. ऋषभदेव शर्मा . साथ में दाएँ अनुवादक प्रो. पी. आदेश्वर राव तथा बाएँ 'संकल्य' के संपादक प्रो. टी. मोहन सिंह. |