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सोमवार, 25 जून 2012

चालाक आदमी अच्छा कवि नहीं हो सकता!



5 टिप्‍पणियां:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

साधुवाद शुभकामना, हे ! मन की दीवार ।

सुषमा सुश्री मुक्तकें, चाँद लगाते चार ।

चाँद लगाते चार, कहें प्रोफ़ेसर गोपी ।

कवी होगा चालाक, भाव पर चाक़ू घोपी ।

बहुत बहुत आभार, ऋषभ जो हमें जोड़ते ।

प्रांत हैदराबाद, बड़ी बंदिशें तोड़ते ।।

रविकर फैजाबादी ने कहा…

साधुवाद शुभकामना, हे ! मन की दीवार ।

सुषमा सुश्री मुक्तकें, चाँद लगाते चार ।

चाँद लगाते चार, कहें प्रोफ़ेसर गोपी ।

कवि रविकर चालाक, भाव पर चाक़ू घोपी ।

बहुत बहुत आभार, ऋषभ जो हमें जोड़ते ।

प्रांत हैदराबाद, बड़ी बंदिशें तोड़ते ।।

अजय कुमार झा ने कहा…

आपकी पोस्ट को हमने आज की पोस्ट चर्चा का एक हिस्सा बनाया है , कुछ आपकी पढी , कुछ अपनी कही , पाठकों तक इसे पहुंचाने का ये एक प्रयास भर है , आइए आप भी देखिए और पहुंचिए कुछ और खूबसूरत पोस्टों तक , टिप्पणी पर क्लिक करें और देखें

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

चालाकी देख कर भाव दूर दूर छिटक जाते हैं..

dr.ram pavesh rai ने कहा…

ekdam sahi kaha sir
kahan chalaki aur kahan srijan