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गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

किसी के दर्द से जन्मी वैदिक ऋचाएं.

हैदराबाद के कादम्बिनी क्लब की गोष्ठी हर महीने तीसरे रविवार को होती है. कई माह से डॉ.अहिल्या मिश्र बुला रही थीं. इस बार पकड़ में आ ही गया मैं - अन्यथा यात्राओं के कारण मित्रों से बुराइयां मिल रही थी. नगर की वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती विनीता शर्मा जी का एकल काव्य-पाठ रहा. छह गीत पढ़े उन्होंने. 

- तुम नहीं मिले कहीं हम तलाशते रहे. 
- जिसे हम गीत कहते हैं : किसी के दर्द से जन्मी हुई वैदिक ऋचाएं हैं. 
- गंध में डूबी नहाई रात रानी रात भर महकी.
- जिस घड़ी आप हम वर्ग में बदल गए. 
- किन्तु मेरा सा तुम्हारा मन नहीं है.
- तब तक आ ही जाना प्रिय तुम जब मैं ओढूं लाल चुनरिया. 

विनीता जी के गीत अनेक अर्थ स्तरों से युक्त होते हैं. उनके विशिष्ट शब्द चयन और औदात्य सृष्टि पर लम्बा व्याख्यान हो गया - घंटे भर का. 


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