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मंगलवार, 14 सितंबर 2010

आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी द्वारा सम्मान समारोह आयोजित







3 टिप्‍पणियां:

गजेन्द्र सिंह ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

भाषा का सवाल सत्ता के साथ बदलता है.अंग्रेज़ी के साथ सत्ता की मौजूदगी हमेशा से रही है. उसे सुनाई ही अंग्रेज़ी पड़ती है और सत्ता चलाने के लिए उसे ज़रुरत भी अंग्रेज़ी की ही पड़ती है,
हिंदी दिवस की शुभ कामनाएं

एक बार इसे जरुर पढ़े, आपको पसंद आएगा :-
(प्यारी सीता, मैं यहाँ खुश हूँ, आशा है तू भी ठीक होगी .....)
http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_14.html

वीरेन्द्र जैन ने कहा…

मुझे पुराने दिन आ गये जब आन्ध्र प्रदेश हिन्दी अकदमी का गठन होना था और मैं हैदराबाद में ही था उन दिनों के संस्मरण गोलकुण्डा दर्पण को भेजे थे पता नहीं उन्होंने छापे या नहीं

cmpershad ने कहा…

हिंदी लेखक का पुरस्कार मिलने पर बधाई:)