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शनिवार, 18 जुलाई 2009

हिलस्टेशन पर कारखाना



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दरअसल काफी अरसे से दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के विश्वविद्यालय विभाग के दूरस्थ माध्यम के कई एक नए पाठ्यक्रमों की पाठ्य सामग्री तैयार करने के सिलसिले में दक्षिण भारत भर में कार्यशालाएँ करते-करते कभी मजाक में कार्यशाला को कारखाना कहने की बदमाशी सूझती रहती थी. इस बार जब २९ जून से ८ जुलाई तक चेन्नई में, ९ जुलाई से १३ जुलाई तक ऊटी में, १३ जुलाई से २१ जुलाई तक हैदराबाद में और २२ जुलाई से २५ जुलाई तक काकीनाडा में ''पाठ्य सामग्री निर्माण कार्यशाला'' के आयोजन की घोषणा हुई , तो सहज ही मुँह से ''कारखाना'' निकल गया.

हाँ तो इस कारखाना शृंखला का दूसरा कारखाना ऊटी में चला. मौसम इस कदर खराब रहा कि बाहर निकलना संभव नहीं था. इसीलिये सभी ने खूब पाठोत्पादन किया. उद्घाटन यों तो कुलसचिव प्रो. दिलीप सिंह जी ने किया पर संयोजक डॉ सतीश पांडेय जी ने ऐसे दीप की व्यवस्था की थी कि कइयों को दीप-प्रज्वलन का अहोभाग्य मिल गया . अपुन ने भी लगे हाथ एक बाती जला ही दी. न जलाते तो डॉ. बिष्णु राय जी नाराज हो जाते ; आखिर उन्होंने टोपी सहित अपना कोट जो हमें दिया था! [उन्होंने हमें ऊटी की बेरहम सर्दी से बचाया ,ईश्वर उन्हें सब बलाओं से बचाए!]
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