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शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

चेन्नई में होली कविगोष्ठी


अभी दसेक दिन के लिए चेन्नई जाना हुआ. कार्यशाला के समापन के अवसर पर तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी ने होली की पूर्व वेला में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के अय्यंगार हाल में कवि गोष्ठी रख ली.कई नए पुराने रचनाकार मित्रों से मुलाकात हुई.

आरंभ में प्रो.दिलीप सिंह ने सबका स्वागत किया.

रमेश गुप्त नीरद से परिचय २० साल पुराना है.उन्होंने उसी मस्त अंदाज़ में प्रेम गीत सुनाए.डॉ. मधु धवन तो संयोजक थीं ही.उनकी कविताएँ सीधी और हास्य का पुट लिए होती हैं. नए लोगों में एक चिकित्सक कवि थे. तरन्नुम में बढ़िया गज़लें पढीं उन्होंने. डॉ.सविता धुडकेवार की कविता में रुष्ट स्त्रीविमर्श दिखा तो डॉ.रविता भाटिया के गीत में दुखी नारीभाव. उषा दीक्षित को पहली बार सुना.उनके स्वर में सामाजिक व्यंग्य और सभ्यता समीक्षा काफी प्रखर हैं. पढ़ती भी खूब हैं.तेलुगुभाषी डॉ. भास्कर शर्मा तथा तमिलभाषी डॉ.वासुदेवन ने भी सामयिक व्यंग्य पढ़े . सभा के प्रधान सचिव सी एन वी अन्नामलई ने आशु कविता सुनाकर तालियाँ बटोरीं.

इस अवसर पर दिल्ली के डॉ. हीरा लाल बाछोतिया की चिंतनपरक कविताओं के साथ मनासा के डॉ.पूरन सहगल के लोकतात्विक नवगीतों को सुनना सचमुच आह्लादकारी रहा. अपुन को तो तेवरियाँ सुनानी पडीं - होली पर केंद्रित.


सोमवार, 8 फ़रवरी 2010

डॉ कविता वाचक्नवी को ''अक्षरम सूचना प्रौद्योगिकी सम्मान - २०१०'' प्रदत्त


''भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्'' के सहयोग से ''अक्षरम'' द्वारा दिल्ली में आयोजित द्विदिवसीय आठवें अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव के अवसर पर डॉ कविता वाचक्नवी को वर्ष २०१० का '' अक्षरम सूचना प्रौद्योगिकी सम्मान '' प्रदान किया गया. इस अवसर पर आयोजित विविध संगोष्ठियों और अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मलेन [विस्तृत समाचार प्रतीक्षित] में भी डॉ.कविता ने अग्रणी भूमिका निभाई.

शतशः अभिनंदन!!!